बांदीकुई. मासूम बचपन! यही तो है, जिस वक्त किसी चीज का कोई भय या किसी से कोई द्वेष नहीं होता। राजस्थान के बांदीकुई में दहशत के पलों के बीच ऐसा ही कुछ देखने को मिला। मामला दो दिन पहले महज 2 साल की बच्ची के बोरवैल में गिर जाने का है। न जाने कब खेलती-खेलती यह मासूम बोरवैल में जा गिरी। इसके बाद 7 घंटे 40 मिनट तक न सिर्फ परिवार के लोगों की, बल्कि प्रशासनिक अमले में शामिल बहादुर लोगों की भी सांसें गले में अटकी रही। दूसरी ओर रैस्क्यू के दौरान कैमरे में कैद हुए कुछ पलों ने सारी मायूसी और थकान को काफूर कर दिया। यह नन्ही लड़की 100 फीट की गहराई में अपने आप में ही मस्त रही। इधर-उधर घूमती-मिट्‌टी लेती और फिर झाड़ देती। करीब पौने 8 घंटे के इस अंतराल में नन्ही अंकिता आधे-आधे घंटे के दो बार सोई भी। देखें Rescue Operation का पूरा VIDEO...

बता दें कि दौसा जिले के बांदीकुई के पास जस्सापाड़ा गांव में गुरुवार सुबह एक महिला मंदिर गई तो नन्ही बेटी को अपने ससुर कमल सिंह के पास छोड़ गई, जो घर के बाहर खुले 200 फीट बोरवैल को बंद करने के लिए मिट्‌टी डालने के काम में लगे थे। 11 बजे कमल सिंह पानी पीने के लिए घर के अंदर चले गए और जैसे ही लौटे तो अंकिता कहीं दिखाई नहीं दी। बूढ़ी आंखें नन्ही हंसी को ढूंढ ही रही थी कि अचानक रोने की आवाज सुनी तो कमल सिंह सन्न रह गए। बोरवैल में झांके तो अंकिता को देखकर आनन-फानन में गांव वालों को बुलाकर लाए। 100 फीट की गहराई, कच्चा बोरवैल। अंदर ना रोशनी और ना ही ऑक्सीजन। इन दिक्कतों के बीच सुबह थोड़ा सा दूध पीने के बाद अंकिता को जिंदगी और मौत से जूझते हुए डेढ़ घंटा बीत गया यानि साढ़े 12 बज गए।

 

प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा तो उस तक ऑक्सीजन पहुंचाई गई। थोड़ी देर बाद एक कैमरा भी भेजा गया। बताया जा रहा है कि अंकिता ने कैमरे को बार-बार पकड़ने की कोशिश की। इसके बाद एसडीआरएफ की टीम उस पर नजर रखने लग गई। पानी से भरकर निप्पल वाली बोतल पहुंचाई गई तो अंकिता ने पकड़ जरूर ली, पर पानी नहीं पीया। ऊपर से मां ने आवाज भी लगाई कि बेटा पानी पी ले...। कुछ देर बाद आए एक और वीडियो ने सबको हैरान कर दिया। घंटों से भूखी यह मासूम आराम से खेल रही थी। सामने मिट्‌टी की कच्ची दीवारों से वह पहले हाथों पर मिट्‌टी लगा लेती और फिर उसे झाड़ देती। चारों ओर घूम-घूम कर वह ऐसा बार-बार करती रही। ऊपर हर किसी को एक-एक पल भारी पड़ रहा था और नीचे वह अपने आप में मस्त थी।

 

आखिरकार 7 घंटे 40 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद शाम 6 बजकर 40 मिनट पर NDRF की टीम ने उसे सकुशल निकाल लिया। गजब की बात है कि बाहर आई तो भी मुस्कुरा ही रही थी। इसके बाद रातभर दौसा के जिला अस्पताल में डॉक्टर्स की निगरानी में रही। शुक्रवार सुबह घर पहुंचते ही सबसे पहले दादी चंदो ने उसे सीने से लगा लिया और फिर उसकी नजर उतारी। दादी ने कहा-मेरी बच्ची नया जन्म लेकर आई है, अब कभी इसे खुद से दूर नहीं होने दूंगी। बताया यह भी जा रहा है कि इस हादसे के वक्त अंकिता के पिता और ताऊ करीब 800 किमी दूर डूंगरपुर में थे। वो वहां ठेकेदारी करते हैं। गिरने और निकाल लिए जाने की दोनों खबरों के अलावा पल-पल के अपडेट फोन पर ही मिले, क्योंकि करीब 16 घंटे के बाद सुबह 4 बजे सीधे अस्पताल पहुंचे।ताऊ सुमेर सिंह ने बताया कि अंकिता बहुत ही नटखट है। वह एक मिनट के लिए भी कहीं नहीं बैठती। अस्पताल से आने के बाद भी उसकी घर पर बदमाशियां शुरू हो गई।

 

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